Friday, 23 February 2018

सोलहवाँ सोमवार।

















आज रात अमावश जैसी लग रही है,
मेरा चाँद मेरे साथ जो है।

लो आ गया तुम्हारी नज़रों के सामने,
क्या आज तुम्हारा सोलहवाँ सोमवार है।

उनका दीदार हुआ और हमें प्यार हुआ,
फिर से आज नया एक त्योहार हुआ।

कदम बहके, होश उड़ गए, बैठे रहे मयखाने में,
इस मोहब्बत में ना जाने और क्या-क्या होगा।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 22 February 2018

मोहब्बत का असर।















कुछ लोगों में ऐसा भी हुनर होता है।
कि धीरे-धीरे मोहब्बत का असर होता है।।

याद करना जिन्हें हमारी रवायत बन गयी है।
फिर भी उनको कुछ नहीं खबर होता है।।

ख्वाहिशों की दुनिया भी बड़ी अजीब होती है।
नहीं मिल सकता उसका भी मंजर होता है।।

हमें देखकर भी वो अनदेखा कर देते हैं।
और सिर्फ उन्हीं पर हमारा नजर होता है।।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 21 February 2018

तुम्हारी बेवफाई।














तुम्हारी बेवफाई ने एक बात तो सीखा दिया,
कि हम अंधों के शहर में आईना बेच रहे थे।
वैसे तो वक़्त ने ज़ख्म ढकने को लिबास दिया,
फिर भी अपनों की चाहत में दर बदर भटक रहे थे।

©नीतिश तिवारी।



Tuesday, 20 February 2018

एक कहानी लिखता हूँ।














चलो आज मैं
एक कहानी
लिखता हूँ।
मैं अपने को 
राजा और 
तुम्हें रानी
लिखता हूँ।

तुम्हारी कही बातें
तुम्हारी ही जुबानी
लिखता हूँ।
जो हमने किया
था प्यार,
उसकी मैं निशानी
लिखता हूँ।

अब नहीं रहे 
हालात पहले जैसे
फिर भी सूखे
दरिया में पानी
लिखता हूँ।
जी रहे थे
हम कभी,
वो हसीन जवानी
लिखता हूँ।

चलो आज मैं
एक कहानी
लिखता हूँ।
कुछ बचपन की
कुछ जवानी की
एक नादानी 
लिखता हूँ।

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 17 February 2018

आधे से ज्यादा, पूरे से कम।















आधे से ज्यादा, पूरे से कम। वो नहीं मिली, इसका मुझे नहीं है कोई गम। हाँ पर दिल को तसल्ली जरूर देता हूँ कि वो अच्छी तो थी। मेरे दिल के बंजर ज़मीन में एक प्यार की सुनहरी बीज को उसने बो जरूर दिया था। वो अलग बात है कि उसके द्वारा बोया गया बीज अब पौधा बनकर किसी और की बगिया को रौशन कर रहा है। और इस पौधे को बाग के मालिक से शिकायत जरूर है। ठीक से पानी नहीं मिलने के कारण इसमें काँटे निकल आये हैं। जो नए बीज पनपने नहीं देते और एक डर सा लगा रहता है कि क्या पौधे का वज़ूद खत्म होने वाला है। तुम्हारे प्यार की बस इतनी सी निशानी थी। जो लिख दिया हमने बस वही एक कहानी थी।

©नीतिश तिवारी।

Thursday, 15 February 2018

वो अधूरी मुलाक़ात।
















हाँ, वो मुलाक़ात
अधूरी ही तो थी,
तुमने देखा
हमने देखा
फिर भी नजरें
अनजान बनी रहीं।

मैं मंज़िल को
देखता रहा,
तुम्हे रास्ते की 
परवाह थी।
जमाने की फिक्र
करके तुम
ना जाने क्यों
बेताब थी।

मेरी ज़िद थी
दीये को जलाने की,
तुम आंधियों को
हवा दे रही थी।
मेरी ज़िद थी
महफ़िल में
मुस्कुराने की,
तुम तन्हाई में
रहकर खुद को
सजा दे रही थी।

हाँ, वो मुलाक़ात
अधूरी ही तो थी,
जब बरसते बादल
में भी तुमने
प्यार को पनपने
ना दिया।
और मेरा दिल
भींगकर भी
प्यासा रह गया।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 14 February 2018

आहट हुई है।















रात के पहर में चुपके से एक आहट हुई है,
किसी अंजान शख्स की दिल में दस्तक हुई है।
पूरे होंगे अरमान, सारे ख्वाब मुकम्मल होंगे,
कोई आनेवाला है, ऐसी सुगबुगाहट हुई है।

©नीतिश तिवारी।

Wednesday, 7 February 2018

मैं सिर्फ़ तुम्हें चाहूँगा.



















पहली धूप से लेकर,
आख़िरी बरसात तक.
ठंडी सुबह से लेकर,
सुहानी शाम तक.
मैं सिर्फ़ तुम्हें चाहूँगा.

फूलों की बगियों से,

बसंत के पतझड़ तक.
रेत के रेगिस्तान से.
बादल के बरखा तक.
मैं सिर्फ़ तुम्हें चाहूँगा.

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 6 February 2018

Exam tips for 10th and 12th students.















दोस्तों, साल का दूसरा महीना शुरू हो गया है और जल्द ही मार्च आ जाएगा. मार्च का महीना हम सब के लिए ख़ास होता है. एक तो इस महीने में होली होती है और दूसरा exams.  स्टूडेंट्स के लिए परीक्षा का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है क्यूंकी पूरे साल जो पढ़ाई की होती है उसका टेस्ट देने का समय होता है. तो आप सभी को कुछ बातों का ख़याल रखना चाहिए जिससे की आपकी परीक्षा अच्छी हो जाए. तो चलिए कौन सी वो ज़रूरी बातें हैं उसका ज़िक्र करते हैं.

1. सबसे पहले आपको अपने सेहत का विशेष ध्यान रखना है. समय से उठिए और समय से सोइए. रात में ज़्यादा देर तक जागना ठीक नहीं है. ख़ान-पान का विशेष रूप से ध्यान देना है.

2. चूँकि अब exam में बहुत कम समय बचा है तो कोई भी नयी चीज़ ना पढ़ें बल्कि जितना आपने पढ़ा है उसी का revision करें. नया पढ़ने के चक्कर में पुराने वाले को भी भूल जाएँगे.

3. Exam सेंटर पर समय से पहले पहुँचें जिससे आपको अपनी सीट ढूँढने में दिक्कत ना हो.

4. प्रश्न पत्र मिलने के बाद सबसे पहले ध्यान से सभी प्रश्नों को पढ़ें और टाइम management कर लें कि कौन से प्रश्न का उत्तर पहले लिखना है. 

5. टाइम management इस तरह से करें कि लास्ट में आके पास 5 मिनट बचा हो और उस समय आप अपनी सारी डीटेल्स ठीक से चेक कर सकते हैं.

6 उन प्रश्नों का उत्तर पहले लिखें जो आपको अच्छे से याद हों. और जिसमें कोई दिक्कत है उसका उत्तर अंतिम में लिखें.

7. अगर कोई प्रश्न बिल्कुल भी याद नहीं है तो भी कुछ ना कुछ उससे related ज़रूर लिखें. कोई भी प्रश्न छोड़कर ना आएँ.

8. तीन घंटे के exam में दो घंटे के बाद एक 5 मिनट का ब्रेक ज़रूर लें. refresh हो जाने के बाद कई बार हमें उत्तर याद आ जाता है.

9. तनाव बिल्कुल ना लें और आराम से exam दीजिए.

10. घर आकर प्रश्नों को उत्तर से match ना करें. इससे आपको बेवजह का tension होगा. सारे exam ख़तम हो जाने के बाद ये काम कर सकते हैं.

तो ये थे कुछ महत्वपूर्ण टिप्स जिनका आप पालन करेंगे तो exam बढ़िया होगा.  All the best for your Exams.

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 4 February 2018

तुझे याद किया.














दिल में जगी कोई उलझन तो तुझे याद किया.
बढ़ने लगी जब धड़कन तो तुझे याद किया.
यूँ तो हर वक़्त मैं उदास रहता था.
अब खुशियों की चाहत हुई तो तुझे याद किया.

©नीतिश तिवारी।
 watch youtube videos here:

Friday, 2 February 2018

आज।














आज खिड़की खोली
तो हवा के एक
झोंके की दस्तक
कमरे में हुई।
और तुम्हारी
मेरे दिल में।

आज लिखने बैठा
तो खयालों के
भँवर में खो
सा गया।
और वो सिर्फ
खयाल नहीं बल्कि
तेरे होने का
एहसास था।

आज रास्ते पर
चलते हुए कुछ
दिखाई नहीं दे रहा।
एक धुंध की 
चादर पड़ी हुई है।
जिसमें अपने
जज्बात लिए लिपटी
हो तुम।

आज एक भीड़
को देखा तो
उसमें भी अजीब
एकान्त दिखा।
क्योंकि उस भीड़
में भी मौजूद
थी तुम, सिर्फ तुम।

©नीतिश तिवारी।

Tuesday, 30 January 2018

शायद प्रेम में...























तुम्हारे पुलकित प्रेम में,
वैसे तो मैं
हर प्रश्न का उत्तर दे पाता हूँ।
लेकिन ना जाने क्यों
तुम्हारे प्रश्नों के सामने
मैं निरुत्तर हो जाता हूँ।
शायद प्रेम में कुछ ऐसा ही होता होगा।

सुबह से शाम हो जाती है
शाम से रात और 
और रात से सुबह।
हर पहर में सिर्फ
तुम याद आती हो।
शायद प्रेम में कुछ ऐसा ही होता होगा।

समंदर नदी को
अपने में समेटती है,
और मैं तुझमें
समा जाता हूँ।
शायद प्रेम में कुछ ऐसा ही होता होगा।

©नीतिश तिवारी।

Saturday, 27 January 2018

लघुकथा- घरेलू हिंसा।

















अंकिता और सुरेश की शादी को दस साल हो गए थे। एक 6 साल की बेटी भी थी। पहले सब कुछ ठीक रहा लेकिन बेटी होने के बाद दोनों में झगड़ा होना शुरू हो गया।
सुरेश अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से पूरा नहीं करता था और बोलने पर अपनी पत्नी को मारता पिटता था।

सुबह का समय था। डाईनिंग टेबल पर नाश्ता लग चुका था। "अरे पीहू बेटी, आ जाओ जल्दी से नाश्ता करने," अंकिता ने अपनी बेटी को आवाज लगाई।
"अभी आ रही हूँ मम्मी बस लिप्स्टिक लगाकर" बेटी ने जवाब दिया।
थोड़ी देर बाद पीहू अपने पूरे चेहरे और हाथ पर लिप्स्टिक से अजीब निशान बनाकर आई। ऐसा लगा मानो वो चोट के निशान थे। पापा ने पूछा," अरे बेटा पीहू ये क्या करके आई हो।" पीहू ने जवाब दिया," कुछ नहीं पापा बस मम्मी के जैसी दिखने की कोशिश कर रही हूँ।"
सुरेश अपनी पत्नी और बेटी से नजर नहीं मिला पा रहा था।

©नीतिश तिवारी।

Sunday, 14 January 2018

ग़ज़ल-रुसवा करके।



















रुसवा करके वो हमें छोड़ गए हैं,
हरे पत्तों को वो तोड़ गए हैं।

गुलाब तोड़ गए वो अपने हिस्से का,
मेरे लिए काँटों को छोड़ गए हैं।

कोई सीधा रास्ता अब नहीं मिलता मुझे,
इस तरह वो रास्तों को मोड़ गए हैं।

आज लिखने में कुछ दर्द हो रहा है,
मेरे हाथों को आज वो मरोड़ गए हैं।

©नीतिश तिवारी।